Dev Uthani Ekadashi mantra, उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द, is sung on the evening of Kartik Shukla Ekadashi to wake Lord Vishnu from his four-month yog nidra. From Devshayani Ekadashi in Ashadh till this day, the period called Chaturmas, weddings, griha pravesh and other big shubh karya are usually put on hold. The day Bhagwan wakes up, the shehnai season starts again.
The festival goes by many names. Prabodhini Ekadashi, Devotthan Ekadashi, Dev Uthani Gyaras in Rajasthan and MP, and Kartiki Ekadashi in Maharashtra, when lakhs of warkaris gather at Pandharpur.
In 2026, Dev Uthani Ekadashi is on 20 November, though some panchangs list it on 21 November. (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर हो सकता है) Please follow the date your family pandit or local temple gives.
विषय सूची | Table of Contents
भगवान विष्णु की योग निद्रा और चातुर्मास
पुराणों में वर्णन आता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनों में साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर तप और स्वाध्याय करते हैं, और गृहस्थ भी खान-पान में संयम रखते हैं। इसीलिए देव उठने का दिन घर-घर में उत्सव की तरह मनाया जाता है।
In Maharashtra this same day is Kartiki Ekadashi. Warkaris who walked to Pandharpur in Ashadh return for Vitthal darshan, and in many homes the day ends with Vitthal-Rukmini bhajans rather than the North Indian thali-bajana. Different customs, same Bhagwan.
Dev Uthani Ekadashi Mantra | उत्तिष्ठ गोविन्द मंत्र
यह भगवान विष्णु को जगाने का पारंपरिक श्लोक है। शाम की पूजा में शंख, घंटी और थाली बजाते हुए इसे बोला जाता है।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते।
त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥
अर्थ: हे गोविन्द, उठिए, उठिए। हे जगत के स्वामी, निद्रा का त्याग कीजिए। हे जगन्नाथ, आपके सोए रहने से यह सारा जगत भी सोया हुआ सा रहता है।
उत्थिते चेष्टते सर्वमुत्तिष्ठोत्तिष्ठ माधव।
गता मेघा वियच्चैव निर्मलं निर्मला दिशः॥
अर्थ: आपके जागने पर ही सब कुछ क्रियाशील होता है, इसलिए हे माधव, उठिए। बादल जा चुके हैं, आकाश निर्मल है और दिशाएं स्वच्छ हो गई हैं।
शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव॥
अर्थ: हे केशव, शरद ऋतु के ये फूल मुझसे स्वीकार कीजिए।
यह श्लोक बहुत सुंदर तरीके से मौसम बदलने की बात भी कहता है। बरसात खत्म, आसमान साफ, और शरद के फूल खिल चुके हैं।
English Transliteration
Uttishthottishtha Govinda tyaja nidraam jagatpate,
Tvayi supte Jagannaatha jagat suptam bhavedidam.
Utthite cheshtate sarvam uttishthottishtha Maadhava,
Gataa meghaa viyach chaiva nirmalam nirmalaa dishah.
Shaaradaani cha pushpaani grihaana mama Keshava.
लोक परंपरा: उठो देव, बैठो देव
उत्तर भारत के गाँवों में संस्कृत श्लोक के साथ-साथ औरतें थाली या सूप बजाते हुए लोक बोल गाती हैं, जैसे “उठो देव, बैठो देव, अंगुरिया चटकाओ देव”। हर इलाके में इसके आगे के बोल अलग होते हैं। मेरी मौसी के गाँव में यह गीत इतना लंबा चलता था कि बच्चे बीच में ही सो जाते थे।
Dev Uthani Ekadashi Mantra Image | देवउठनी मंत्र इमेज
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देवउठनी एकादशी पूजा विधि
दशमी की रात
एकादशी से एक दिन पहले सात्त्विक भोजन करें और रात में चावल न खाएं। अगले दिन के व्रत का मन में संकल्प कर लें।
एकादशी की सुबह
स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) करें, और बाकी दिन भी यह नाम मन में चलता रहे। If you are at office, a few rounds on the way are perfectly fine. व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें: निर्जल, फलाहार या एक समय भोजन।
शाम को देव उठाना
- आँगन या पूजा घर में गेरू और चावल के आटे से भगवान के चरण और चौक बनाएं।
- उस पर गन्ना, सिंघाड़ा, बेर, शकरकंद, मूली जैसे मौसमी फल-सब्ज़ियाँ रखें।
- एक डलिया या परात से इन्हें ढक दें। कई घरों में गन्ने से मंडप भी बनाया जाता है।
- दीपक जलाएं, फिर शंख, घंटी या थाली बजाते हुए उत्तिष्ठ गोविन्द मंत्र बोलें और डलिया हटा दें।
- भगवान को पीला फूल, तुलसी दल और भोग अर्पित कर आरती करें।
द्वादशी को पारण
अगले दिन द्वादशी तिथि में, पंचांग में दिए पारण समय के अंदर, ब्राह्मण या किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराकर व्रत खोलें।
इस दिन से क्या शुरू होता है
| कार्य | परंपरा |
|---|---|
| विवाह | चातुर्मास के बाद शुभ मुहूर्त फिर से मिलने लगते हैं |
| तुलसी विवाह | कई घरों में इसी दिन या अगले दिन शालिग्राम और तुलसी का विवाह |
| गृह प्रवेश, मुंडन | पंचांग देखकर इसके बाद किए जाते हैं |
| गन्ने की पूजा | कई क्षेत्रों में नया गन्ना इसी दिन पूजकर खाया जाता है |
2026 में तुलसी विवाह 21 नवंबर को है। उसकी पूरी विधि और मंत्र के लिए Tulsi Mantra और Tulsi Vivah वाली पोस्ट पढ़ें।
Dev Uthani Ekadashi ke Fayde | व्रत के लाभ
- शास्त्रों के अनुसार प्रबोधिनी एकादशी का व्रत बहुत पुण्यदायी माना गया है।
- भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।
- अविवाहित लोगों के विवाह में आ रही रुकावटें दूर होने की कामना से भी यह व्रत रखा जाता है।
- संयम और उपवास से मन हल्का और शांत महसूस होता है, ऐसा व्रती बताते हैं।
सावधानियां
- एकादशी के दिन चावल नहीं खाए जाते।
- तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन न तोड़ें। एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
- गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग या दवा लेने वाले लोग निर्जल व्रत न रखें, फलाहार करें।
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Dev Uthani Ekadashi 2026 kab hai?
ज़्यादातर पंचांगों में 20 नवंबर 2026 है, कुछ में 21 नवंबर। अपने क्षेत्र के पंचांग या मंदिर से पुष्टि कर लें।
भगवान को जगाने का मंत्र कौन सा है?
“उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥” यही Dev Uthani Ekadashi mantra के रूप में सबसे प्रसिद्ध है।
देवउठनी एकादशी पर क्या दान करें?
परंपरा में अन्न, गुड़, गन्ना, मौसमी फल, ऊनी कपड़े और दीपदान का विशेष महत्व बताया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ज़रूरतमंद की मदद करें।
क्या बिना व्रत रखे देव उठा सकते हैं?
हाँ। स्वास्थ्य या काम की मजबूरी में व्रत न रख पाएं तो भी शाम की पूजा और मंत्र पूरे मन से करें।
देवउठनी और देवशयनी एकादशी में क्या अंतर है?
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) को भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) को जागते हैं। इन दोनों के बीच का समय चातुर्मास कहलाता है।


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