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Shantakaram Bhujagashayanam Lyrics: विष्णु मंत्र अर्थ सहित

  • Pavitr Mantra
  • September 28, 2026
  • 2 min read
Shantakaram Bhujagashayanam Lyrics: विष्णु मंत्र अर्थ सहित

Shantakaram Bhujagashayanam is the Vishnu shloka that plays in the background of so many TV serials and temple morning speakers that almost everyone can hum the tune. But ask someone to write down all four lines correctly and most of us get stuck after “Padmanabham Suresham”.

For me it is tied to Thursdays. My nani kept a fast every Guruvar, wore something yellow, and before lighting the lamp in front of the small brass Vishnu idol she would say this shloka in a slow, sing-song voice. No mala, no counting. Just once, with full attention, and then the aarti.

That is really the right way to think of it. This is a dhyan shloka, a verse to picture Lord Vishnu in your mind before you begin any puja, not a mantra to be counted in thousands.

Shantakaram Bhujagashayanam Lyrics | शान्ताकारं भुजगशयनं

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

Transliteration: Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham, Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam, Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam, Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham.

अर्थ सहित

अर्थ: जिनका स्वरूप अत्यंत शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि से कमल निकला है, जो देवताओं के भी ईश्वर हैं, जो पूरे विश्व के आधार हैं, आकाश की तरह अनंत और सर्वव्यापी हैं, बादल जैसे श्याम वर्ण वाले हैं और जिनके सभी अंग सुंदर हैं, जो लक्ष्मी जी के पति हैं, जिनके नेत्र कमल जैसे हैं और जिन्हें योगी ध्यान द्वारा प्राप्त करते हैं, संसार के भय को हरने वाले, सभी लोकों के एकमात्र स्वामी उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।

कठिन शब्दों के अर्थ

  • भुजगशयनं = भुजग (सर्प, यानी शेषनाग) पर शयन करने वाले
  • पद्मनाभं = जिनकी नाभि में कमल है, जिससे ब्रह्मा जी प्रकट हुए
  • गगनसदृशं = आकाश के समान, जिसकी कोई सीमा नहीं
  • मेघवर्णं = वर्षा के बादल जैसे श्याम रंग वाले
  • योगिभिर्ध्यानगम्यं = योगियों को ध्यान से प्राप्त होने वाले
  • भवभयहरं = संसार (जन्म-मरण) के डर को दूर करने वाले

साँप पर इतनी शांति क्यों?

मुझे यह श्लोक इसके पहले ही शब्द की वजह से सबसे ज़्यादा पसंद है। ज़रा सोचिए, हज़ार फन वाला शेषनाग, नीचे उफनता क्षीरसागर, और उस पर भगवान पूरी शांति से लेटे हैं। यही तो “शान्ताकारं” है। संसार में डर और उथल-पुथल रहेगी ही, पर मन को शांत रखना हमारे हाथ में है।

Many teachers explain it this way: the serpent stands for time and worldly trouble, and Vishnu resting calmly on it shows a mind that is not shaken by either. Keep that picture in your head while you recite, and the shloka starts to feel very different.

यह श्लोक विष्णु सहस्रनाम के कई पाठों में ध्यान श्लोकों के साथ भी पढ़ा जाता है। इसके मूल ग्रंथ को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं, इसलिए हम इसे परंपरागत विष्णु ध्यान श्लोक ही कहेंगे।

दूसरा श्लोक: यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुतः

बहुत-से भजन और रिकॉर्डिंग में शान्ताकारं के ठीक बाद यह श्लोक गाया जाता है। यह श्रीमद्भागवत महापुराण के बारहवें स्कंध के तेरहवें अध्याय का पहला श्लोक है।

यं ब्रह्मावरुणेन्द्ररुद्रमरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैः स्तवै-
र्वेदैः साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगाः।
ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो
यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणा देवाय तस्मै नमः॥

अर्थ: ब्रह्मा, वरुण, इंद्र, रुद्र और मरुद्गण दिव्य स्तुतियों से जिनका गुणगान करते हैं, सामवेद के गायक अंगों, पद-क्रम और उपनिषदों सहित वेदों से जिनका गान करते हैं, योगी ध्यान में स्थिर और तल्लीन मन से जिनका दर्शन करते हैं, और देवता व असुर भी जिनका अंत नहीं जानते, उन परमदेव को नमस्कार है।

Shantakaram Mantra Image | विष्णु मंत्र इमेज

गुरुवार या एकादशी की पूजा में सामने रखने के लिए यह shantakaram bhujagashayanam image save या download कर लीजिए।

विष्णु ध्यान मंत्र - shantakaram bhujagashayanam image
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विष्णु ध्यान और पूजा विधि

कब पढ़ें

गुरुवार, हर एकादशी, और रोज़ सुबह की पूजा की शुरुआत में। इस साल देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को है, कुछ पंचांगों में 21 नवंबर (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर हो सकता है)। चार महीने की योगनिद्रा के बाद भगवान के जागने का यह दिन इस श्लोक के लिए बहुत ख़ास माना जाता है। उस दिन की पूरी विधि देवउठनी एकादशी मंत्र वाले लेख में है।

ध्यान कैसे करें

  1. दीपक जलाकर विष्णु जी की तस्वीर या शालिग्राम के सामने बैठें।
  2. आँखें बंद करें और श्लोक को धीरे-धीरे बोलें।
  3. हर शब्द के साथ मन में चित्र बनाएँ: क्षीरसागर, शेषनाग की शय्या, नाभि से निकला कमल, बादल जैसा श्याम रंग, पास बैठी लक्ष्मी जी।
  4. आख़िरी पंक्ति “वन्दे विष्णुं” पर मन ही मन प्रणाम करें।
  5. इसके बाद पीले फूल, तुलसी दल और भोग अर्पित करके आरती करें।

अगर समय कम हो

If mornings are a rush, just say the shloka once while lighting the diya. One mindful recitation is far better than five rushed ones. Kids can learn it in about a week if you say it together at the same time every day.

Benefits | शान्ताकारं मंत्र के फायदे

  • मान्यता है कि भगवान विष्णु का ध्यान “भवभय”, यानी जीवन की चिंताओं और डर को कम करता है।
  • पूजा से पहले ध्यान श्लोक पढ़ने से मन एकाग्र होता है और पूजा में भाव आता है।
  • भक्तों का विश्वास है कि गुरुवार को इसका पाठ घर में शांति और सुख-समृद्धि लाता है।
  • भगवान के “शांत आकार” का ध्यान करने से स्वभाव में भी धीरे-धीरे शांति आती है।

गुरुवार और एकादशी: एक नज़र में

दिन रंग अर्पण पाठ
गुरुवार पीला चने की दाल, गुड़, केला शान्ताकारं, विष्णु सहस्रनाम
एकादशी पीला या सफ़ेद तुलसी दल, फल शान्ताकारं, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Shantakaram bhujagashayanam किस भगवान का मंत्र है?

यह भगवान विष्णु का ध्यान श्लोक है, जिसमें उनके क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करने वाले रूप का वर्णन है।

क्या इसे 108 बार जपना चाहिए?

यह जप मंत्र से ज़्यादा ध्यान श्लोक है, इसलिए एक या तीन बार पूरे भाव से पढ़ना काफ़ी है। संख्या वाले जप के लिए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” बेहतर माना जाता है।

क्या महिलाएँ और बच्चे इसे पढ़ सकते हैं?

हाँ, कोई भी श्रद्धा से इसका पाठ कर सकता है। इसके लिए कोई विशेष दीक्षा ज़रूरी नहीं है।

“मेघवर्णं” का मतलब काला रंग है क्या?

मेघवर्ण का अर्थ है वर्षा वाले घने बादल जैसा गहरा श्याम-नीला रंग। इसी वजह से विष्णु और कृष्ण को “घनश्याम” भी कहते हैं।

Is Shantakaram part of Vishnu Sahasranamam?

It is commonly recited among the dhyana (meditation) verses before Vishnu Sahasranamam in many traditions, though it is also chanted on its own before daily puja.

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

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Pavitr Mantra

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