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Navratri 9 Devi Mantra: नवदुर्गा के 9 मंत्र अर्थ सहित और जाप विधि

  • Pavitr Mantra
  • September 28, 2026
  • 2 min read
Navratri 9 Devi Mantra: नवदुर्गा के 9 मंत्र अर्थ सहित और जाप विधि

Navratri 9 Devi mantra is the one thing our family WhatsApp group asks for every October, right after the question of which colour to wear. Each of the nine days belongs to one form of Maa Durga, and each form has her own dhyan shloka and a short naam mantra. Knowing which mantra belongs to which day makes the daily puja feel far more connected.

My nani kept a small notebook for Navratri. One page for each devi, the shloka written on top in blue ink, the bhog noted below in pencil. I still have photocopies of it. This post is that notebook, checked against the traditional texts, with simple Hindi meanings added.

Sharad Navratri 2026 begins on 11 October and ends on 19 October, with Ashtami and Navami both falling on 19 October and Dussehra on 20 October (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर हो सकता है). Below are all nine mantras, a mantra image, a bhog table and an easy jaap method.

नौ देवियों के नाम एक साथ याद रखने का सबसे पुराना तरीका यह श्लोक है। यह दुर्गा सप्तशती के साथ पढ़े जाने वाले देवी कवच में आता है, और बहुत से घरों में नवरात्रि की पूजा इसी से शुरू होती है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥

अर्थ: पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चन्द्रघण्टा, चौथी कूष्माण्डा, पाँचवीं स्कन्दमाता, छठी कात्यायनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री। ये नौ रूप नवदुर्गा कहलाते हैं, और ये नाम स्वयं ब्रह्मा जी ने बताए हैं।

हर देवी के लिए पहले ध्यान श्लोक है, फिर छोटा नाम मंत्र जिसकी माला की जा सकती है। समय कम हो तो सिर्फ नाम मंत्र भी पूरी श्रद्धा से बोलें, वह भी काफी है।

पहला दिन: माँ शैलपुत्री

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

अर्थ: मनचाहे फल के लिए मैं उन यशस्विनी शैलपुत्री को प्रणाम करता हूँ, जिनके मस्तक पर अर्धचन्द्र है, जो वृषभ पर सवार हैं और त्रिशूल धारण करती हैं।

दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

अर्थ: जो अपने कर-कमलों में जप माला और कमण्डलु रखती हैं, वे सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मचारिणी देवी मुझ पर प्रसन्न हों।

तीसरा दिन: माँ चन्द्रघण्टा

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

अर्थ: श्रेष्ठ वाहन सिंह पर सवार, प्रचंड अस्त्रों से युक्त, चन्द्रघण्टा नाम से प्रसिद्ध देवी मुझ पर कृपा करें।

चौथा दिन: माँ कूष्माण्डा

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

अर्थ: जो अपने कर-कमलों में भरे हुए दो कलश धारण करती हैं, वे कूष्माण्डा देवी मेरे लिए शुभ फल देने वाली हों।

पाँचवाँ दिन: माँ स्कन्दमाता

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

अर्थ: सदा सिंहासन पर विराजमान, दोनों हाथों में कमल लिए यशस्विनी स्कन्दमाता हमेशा शुभ देने वाली हों।

छठा दिन: माँ कात्यायनी

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

अर्थ: हाथ में चमकती चन्द्रहास तलवार लिए, सिंह पर सवार, दानवों का नाश करने वाली कात्यायनी देवी हमें शुभ प्रदान करें।

सातवाँ दिन: माँ कालरात्रि

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

अर्थ: इस श्लोक में माँ कालरात्रि के उग्र रूप का वर्णन है: एक वेणी, कानों में गुड़हल के फूल, गधे पर सवारी, तेल से सना श्याम शरीर और बाएँ पैर में लोहे का काँटेदार आभूषण। रूप भयंकर है, पर भक्तों के लिए यही माँ शुभंकरी कहलाती हैं।

आठवाँ दिन: माँ महागौरी

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

अर्थ: सफेद वृषभ पर सवार, श्वेत वस्त्र पहने, पवित्र और महादेव को आनंद देने वाली महागौरी हमें शुभ दें।

नौवाँ दिन: माँ सिद्धिदात्री

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

अर्थ: सिद्ध, गन्धर्व, यक्ष, असुर और देवता भी जिनकी सेवा करते हैं, वे सिद्धिदात्री माँ हमें सिद्धि देने वाली हों।

If you read Roman script more easily, the naam mantra pattern is simple: Om Devi Shailputryai Namah, and so on for each devi.

नवदुर्गा के नौ नामों वाली यह मंत्र इमेज आप अपने फोन में सेव या डाउनलोड कर लें, ताकि पूजा के समय किताब ढूँढनी न पड़े।

नवदुर्गा के नौ स्वरूप - navratri 9 devi mantra image
नवदुर्गा के नौ स्वरूप – navratri 9 devi mantra image — image पर क्लिक करके download करें

Day-wise Devi and Bhog | दिन के अनुसार देवी और भोग

नीचे उत्तर भारत में प्रचलित भोग सूची है। आपके घर की परंपरा अलग हो, तो वही जारी रखें।

दिन देवी प्रचलित भोग
1 शैलपुत्री गाय का घी
2 ब्रह्मचारिणी शक्कर या मिश्री
3 चन्द्रघण्टा दूध या खीर
4 कूष्माण्डा मालपुआ
5 स्कन्दमाता केला
6 कात्यायनी शहद
7 कालरात्रि गुड़
8 महागौरी नारियल
9 सिद्धिदात्री तिल, हलवा-चना

समय

सुबह स्नान के बाद का समय सबसे अच्छा माना जाता है। शाम की आरती से पहले भी जाप कर सकते हैं।

आसन और दिशा

लाल या ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। सामने माँ की तस्वीर या कलश हो, और घी का दीया जला हो।

माला और संख्या

रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला ली जा सकती है। उस दिन की देवी का नाम मंत्र 108 बार जपें। पहले एक बार ध्यान श्लोक पढ़ें, फिर माला शुरू करें।

अगर समय कम है

If you are a working person and can’t sit for long, just read the dhyan shloka once and chant the naam mantra 11 times before leaving home. Honestly, my own weekday Navratri looks exactly like this, and the full mala happens on the weekend.

नवरात्रि में जिनके पास ज़्यादा समय है, वे सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी साथ में जोड़ सकते हैं।

  • माना जाता है कि हर दिन की देवी का मंत्र जपने से उस स्वरूप की विशेष कृपा मिलती है।
  • शास्त्रों के अनुसार शैलपुत्री स्थिरता देती हैं और ब्रह्मचारिणी तप व संयम की शक्ति।
  • कात्यायनी मंत्र विवाह से जुड़ी बाधाओं के लिए भी श्रद्धा से जपा जाता है।
  • Devotees believe Kalaratri’s mantra removes fear and negative thoughts.
  • रोज़ तय समय पर बैठने से मन शांत रहता है।

FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Navratri 9 Devi mantra kab padhna chahiye?

उसी दिन जिस दिन उस देवी की पूजा होती है, सुबह या शाम की पूजा के समय। पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, इसी क्रम में।

क्या ध्यान श्लोक याद न हो तो सिर्फ नाम मंत्र चलेगा?

हाँ। ध्यान श्लोक पढ़कर सुनाना अच्छा है, पर श्रद्धा से बोला गया छोटा नाम मंत्र भी पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है।

Sharad Navratri 2026 kab se kab tak hai?

11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक। अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को हैं और दशहरा 20 अक्टूबर को।

नौ देवियों के मंत्र के साथ और क्या पढ़ें?

दुर्गा सप्तशती का पाठ न हो सके, तो या देवी सर्वभूतेषु वाली स्तुति पढ़ें और शाम को माँ की आरती करें।

जय माता दी। माँ सबके घर में सुख और शांति बनाए रखें।

Written by

Pavitr Mantra

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