Siddh Kunjika Stotram lyrics are what I reach for on the Navratri mornings when there simply isn’t time for the full Durga Saptashati. The Saptashati has 700 shlokas across 13 chapters and takes a good two to three hours if you read it properly. Kunjika is short, maybe ten minutes, and yet tradition says it carries the fruit of the whole path.
The word kunjika means a small key. Lord Shiva himself calls it the key that opens up the power of the Chandi path. As per tradition it comes from the Rudrayamala Tantra, in the Gauri Tantra section, as a conversation between Shiva and Parvati.
Below are the complete Siddh Kunjika Stotram lyrics in Devanagari with verse-wise Hindi meaning, and the simple paath vidhi my mausi taught me in Jabalpur.
विषय सूची | Table of Contents
Siddh Kunjika Stotram Lyrics | सिद्ध कुंजिका स्तोत्र संपूर्ण पाठ
स्तोत्र चार हिस्सों में है: पहले शिव जी का परिचय, फिर मूल मंत्र, फिर आठ स्तुति श्लोक और अंत में फलश्रुति। नीचे हर हिस्से के बाद उसका सरल अर्थ दिया है।
शिव उवाच (परिचय)
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥
अर्थ: शिव जी कहते हैं, हे देवी, सुनो, मैं उत्तम कुंजिका स्तोत्र बताता हूँ, जिसके मंत्र-प्रभाव से चण्डी पाठ शुभ फल देता है। इसके लिए कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास या अर्चन की भी ज़रूरत नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ से दुर्गा पाठ का फल मिल जाता है। यह अत्यंत गुप्त है और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। हे पार्वती, इसे प्रयत्नपूर्वक गुप्त रखना। मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन, उच्चाटन जैसे तांत्रिक कर्म भी इसके पाठ से सिद्ध होते हैं, ऐसा यहाँ कहा गया है।
ये तंत्र-शास्त्र के पुराने शब्द हैं। घरों में भक्त यह स्तोत्र माँ की कृपा और रक्षा के लिए पढ़ते हैं, किसी के अहित के लिए नहीं।
अथ मन्त्रः (मूल मंत्र)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
अर्थ: पहली पंक्ति नवार्ण मंत्र है, जो माँ चामुण्डा को समर्पित है। बाकी हिस्सा बीजाक्षरों से बना है, जिनका शब्द-दर-शब्द अनुवाद नहीं होता। ‘ज्वालय, प्रज्वल’ का भाव है: हे माँ, मेरी साधना को जगाओ और प्रकाशित करो।
स्तुति (आठ श्लोक)
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे॥२॥
अर्थ: रुद्र रूप वाली, मधु और कैटभ का संहार करने वाली, महिषासुर का वध करने वाली देवी, तुम्हें नमस्कार। शुम्भ और निशुम्भ का नाश करने वाली हे महादेवी, मेरे जप को जाग्रत और सिद्ध करो।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥
अर्थ: ‘ऐं’ रूप में तुम सृष्टि हो, ‘ह्रीं’ रूप में पालन करती हो, ‘क्लीं’ रूप में कामरूपिणी हो। बीज रूपिणी माँ, तुम्हें नमस्कार। ‘चामुण्डा’ रूप में चण्ड का नाश करती हो, ‘यै’ रूप में वर देती हो और ‘विच्चे’ रूप में सदा अभय देती हो। मंत्र रूपिणी माँ, तुम्हें प्रणाम। ध्यान दें, ये दोनों श्लोक नवार्ण मंत्र के हर अक्षर को खोलकर समझाते हैं।
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥
अर्थ: तुम धूर्जटि यानी शिव की पत्नी हो, वाणी की स्वामिनी हो, कालिका देवी हो; मेरा कल्याण करो। हुंकार रूपिणी, जम्भ असुर का नाश करने वाली, भैरवी, हे कल्याणी भवानी, तुम्हें बार-बार नमस्कार।
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥
अर्थ: सातवाँ श्लोक बीजाक्षरों की प्रार्थना है: बंधन तोड़ो, साधना को दीप्त करो। आठवें में माँ को पूर्णा पार्वती और आकाश में विचरने वाली खेचरी कहा गया है, और प्रार्थना है कि सप्तशती के मंत्र मेरे लिए सिद्ध हों।
फलश्रुति
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।
अर्थ: यह कुंजिका स्तोत्र मंत्रों को जगाने के लिए है। हे पार्वती, इसे अभक्त को मत देना, गुप्त रखना। जो कुंजिका के बिना सप्तशती पढ़ता है, उसका पाठ वैसे ही फल नहीं देता जैसे जंगल में रोना किसी को सुनाई नहीं देता।
Siddh Kunjika Mantra Image | कुंजिका मंत्र इमेज
Siddh Kunjika Stotram lyrics का सबसे ज़रूरी हिस्सा, यानी मूल मंत्र, इस इमेज में है। इसे फोन में सेव या डाउनलोड कर लें।

Kunjika Stotram Path Vidhi | पाठ करने की सही विधि
- स्नान करके साफ कपड़े पहनें। लाल रंग हो तो और अच्छा।
- माँ दुर्गा की तस्वीर के आगे घी का दीपक जलाएँ, लाल फूल और थोड़ा अक्षत रखें।
- हाथ में जल लेकर मन में अपना नाम, गोत्र और इच्छा बोलें। यही सरल संकल्प है।
- पहले एक बार गणेश जी का नाम लें, फिर पूरा स्तोत्र धीरे-धीरे पढ़ें।
- अंत में क्षमा प्रार्थना करें और माँ को प्रणाम करें।
Most people read it once a day in Navratri; some do 3 or 11 paths. Honestly, one unhurried path beats three rushed ones.
अगर आप सप्तशती पाठ कर रहे हैं तो कुंजिका उससे पहले पढ़ी जाती है। अलग से पढ़ना हो तो सुबह या शाम, किसी भी शांत समय में पढ़ सकते हैं।
Kunjika Stotram Benefits | सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के फायदे
- शास्त्रों के अनुसार इसके पाठ से पूरी दुर्गा सप्तशती के पाठ का फल मिलता है।
- माना जाता है कि यह मंत्र-जप को जाग्रत करता है, इसलिए दूसरे मंत्रों की साधना से पहले भी पढ़ा जाता है।
- Devotees believe it gives a feeling of protection when the mind is anxious.
- नवरात्रि में कम समय में माँ की पूरी उपासना का भाव मिलता है।
Niyam | ध्यान रखने वाली बातें
- बीजाक्षर जैसे ह्रीं, क्लीं, ग्लौं ध्यान से बोलें। शुरुआत में किसी जानकार से एक बार सुन लें।
- इसे किसी के अहित की भावना से न पढ़ें। यह माँ की भक्ति का स्तोत्र है।
नौ दिनों में हर देवी का अलग मंत्र भी जपना हो, तो हमारी नवदुर्गा मंत्र सूची देखें।
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Siddh Kunjika Stotram kab padhna chahiye?
नवरात्रि में रोज़, या किसी भी मंगलवार, शुक्रवार और अष्टमी को। सुबह स्नान के बाद या शाम की आरती से पहले पढ़ना अच्छा माना जाता है।
क्या बिना गुरु दीक्षा के कुंजिका स्तोत्र पढ़ सकते हैं?
घरों में लाखों भक्त इसे श्रद्धा से पढ़ते हैं। भक्ति भाव से पाठ करने में कोई मनाही नहीं मानी जाती, पर विशेष तांत्रिक प्रयोग के लिए गुरु का मार्गदर्शन ज़रूरी है।
कुंजिका स्तोत्र किस ग्रंथ से है?
परंपरा के अनुसार यह रुद्रयामल तंत्र के गौरी तंत्र भाग से है, जहाँ शिव जी पार्वती जी को यह स्तोत्र बताते हैं।
इसके साथ और कौन सा पाठ करें?
पाठ के बाद या देवी सर्वभूतेषु स्तुति पढ़ना बहुत सुंदर लगता है; दोनों मिलाकर पंद्रह मिनट भी नहीं लगते।
जय माँ चामुण्डा।

