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Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra: या देवी सर्वभूतेषु अर्थ सहित

  • Pavitr Mantra
  • September 28, 2026
  • 2 min read
Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra: या देवी सर्वभूतेषु अर्थ सहित

The Ya Devi Sarva Bhuteshu mantra is one of those prayers most of us knew before we could read. In Bengal many people first hear it before sunrise on Mahalaya, on the radio. In our Delhi colony it was the loudspeaker at the Durga pandal. The tune changes from place to place, but the words stay the same.

What most people don’t realise is that it is not a single line. It is a long stuti from the fifth chapter of the Durga Saptashati, where the devas, troubled by the demons Shumbha and Nishumbha, go to the Himalaya and praise the Devi. They see her in everything: in intelligence, in hunger, in sleep, even in confusion.

That last part is what I love. The prayer does not say Maa lives only in the good things. She is everywhere.

Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra Lyrics | या देवी सर्वभूतेषु संपूर्ण स्तुति

पाठ की शुरुआत इस प्रणाम श्लोक से होती है:

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥

अर्थ: देवी को, महादेवी को, कल्याणकारी शिवा को सदा नमस्कार। प्रकृति रूपी भद्रा को हम नियमपूर्वक प्रणाम करते हैं।

इसके बाद इक्कीस रूपों वाली स्तुति आती है। हर पंक्ति के बाद “नमस्तस्यै” वाली पंक्ति दोहराई जाती है।

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

और अंत में ये दो श्लोक:

इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो सभी प्राणियों की इन्द्रियों की अधिष्ठात्री हैं और सब भूतों में सदा व्याप्त हैं, उन व्याप्ति देवी को नमस्कार। जो चेतना के रूप में इस पूरे जगत में फैलकर स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार।

Transliteration of the most chanted line: Ya Devi Sarva Bhuteshu Shakti Rupena Samsthita, Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah.

21 Roop Ka Arth | इक्कीस रूपों का अर्थ

अर्थ: हर पंक्ति का भाव एक ही है: “जो देवी सब प्राणियों में ___ के रूप में स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, नमस्कार, बार-बार नमस्कार।” खाली जगह में कौन सा रूप आता है, वह नीचे देखें।

रूप सरल अर्थ
विष्णुमाया विष्णु की माया, जिससे संसार चलता है
चेतना हर जीव में जागरूकता
बुद्धि समझ और विवेक
निद्रा नींद, जो शरीर को आराम देती है
क्षुधा भूख
छाया छाया और आश्रय
शक्ति ऊर्जा और बल
तृष्णा प्यास और इच्छा
क्षान्ति क्षमा और सहनशीलता
जाति जन्म और मूल स्वभाव
लज्जा मर्यादा और संकोच
शान्ति मन की शांति
श्रद्धा आस्था
कान्ति सुंदरता और तेज
लक्ष्मी धन और समृद्धि
वृत्ति आजीविका और व्यवहार
स्मृति याददाश्त
दया करुणा
तुष्टि संतोष
मातृ माँ का रूप
भ्रान्ति भ्रम

भूख, नींद और भ्रम को भी देवी का रूप कहना पहली बार अजीब लगता है। पर यही इस स्तुति की खूबसूरती है: जीवन का कोई हिस्सा माँ से बाहर नहीं है।

Ya Devi Mantra Image | या देवी सर्वभूतेषु मंत्र इमेज

Ya Devi Sarva Bhuteshu mantra की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति, शक्तिरूपेण संस्थिता, इस इमेज में है। इसे सेव या डाउनलोड करके फोन वॉलपेपर भी बना सकते हैं।

या देवी स्तुति - ya devi sarva bhuteshu mantra image
या देवी स्तुति – ya devi sarva bhuteshu mantra image — image पर क्लिक करके download करें

Path Kaise Karein | पाठ कैसे करें

पूरा पाठ

नवरात्रि में सुबह या शाम दीपक जलाकर ऊपर दिया पूरा पाठ एक बार करें। इसमें पाँच-सात मिनट लगते हैं। हर “नमस्तस्यै” के साथ सिर झुकाकर प्रणाम करने की परंपरा भी कई घरों में है।

छोटा पाठ

Short on time? Just chant the Shakti line 11 or 21 times. Many people add the Matri line too, especially mothers praying for their children.

मेरी माँ अष्टमी के दिन कन्या पूजन से पहले घर की सब बेटियों को बिठाकर यह स्तुति साथ में पढ़वाती थीं। छोटी बच्चियाँ बस “नमस्तस्यै नमस्तस्यै” वाली पंक्ति ज़ोर से बोलती थीं, और वही सबसे प्यारा हिस्सा होता था। घर में बच्चे हों तो उन्हें ऐसे ही जोड़ें।

साथ में क्या पढ़ें

जो भक्त दुर्गा सप्तशती नहीं पढ़ पाते, वे पहले सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और फिर यह स्तुति पढ़ते हैं।

Benefits | या देवी सर्वभूतेषु पाठ के फायदे

  • माना जाता है कि यह स्तुति मन से डर और बेचैनी कम करती है।
  • शास्त्रों के अनुसार देवताओं ने संकट के समय यही स्तुति की थी, इसलिए कठिन समय में इसे पढ़ने की परंपरा है।
  • Devotees believe chanting the Buddhi and Smriti lines helps students stay focused.
  • रोज़ पढ़ने से हर चीज़ में माँ को देखने का भाव बनता है।

Uchcharan Ki Galtiyan | उच्चारण में आम गलतियाँ

  • “सर्वभूतेषु” में ष है, “सर्वभूतेशु” नहीं।
  • “संस्थिता” को “सनस्थिता” न बोलें।
  • “नमस्तस्यै” में स्त और स्य दोनों साफ बोलें।
  • दूसरी पंक्ति “चेतनेत्यभिधीयते” है, इसमें “संस्थिता” नहीं आता।

FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Ya Devi Sarva Bhuteshu mantra kis granth se hai?

यह दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय की स्तुति है, जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है।

क्या यह मंत्र रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, कोई विशेष नियम नहीं है। नवरात्रि के अलावा भी सुबह-शाम पढ़ा जा सकता है।

इस स्तुति में देवी के कितने रूप हैं?

“या देवी सर्वभूतेषु” वाली इक्कीस पंक्तियाँ हैं, साथ में शुरुआत और अंत के श्लोक।

Kya bina deeksha ke padh sakte hain?

हाँ। यह स्तुति है, कोई गुप्त तांत्रिक मंत्र नहीं। घरों में बच्चे-बड़े सब इसे पढ़ते हैं।

पाठ के बाद क्या करें?

माँ को प्रणाम करें और हो सके तो जय अम्बे गौरी आरती गाएँ।

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Pavitr Mantra

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