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Aarti

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics: दुर्गा आरती अर्थ सहित हिंदी में

  • Pavitr Mantra
  • September 28, 2026
  • 2 min read
Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics: दुर्गा आरती अर्थ सहित हिंदी में

Jai Ambe Gauri aarti lyrics are probably the first Hindi devotional lines I learnt by heart, long before school poems. Every Friday evening my grandmother would light the ghee diya, hand me the small brass bell, and the whole house would join in by the second line. Even the neighbours’ kids would come running for the prasad at the end.

This is the most sung Durga aarti in North India. During Navratri you will hear it in every pandal, every temple and almost every home, usually twice a day. The last stanza names its poet, Shivanand Swami, which is how we know who composed it.

Here is the full aarti in Hindi, what each stanza actually means, and the traditional way to move the aarti thali.

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics | अम्बे जी की आरती

हर अंतरे के बाद “ॐ जय अम्बे गौरी” दोहराएँ।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥

अलग-अलग किताबों और क्षेत्रों में एक-दो शब्दों का फर्क मिलता है, जैसे “भैरों” की जगह “भैरूं” या “निशदिन” की जगह “निशिदिन”। भाव वही रहता है, इसलिए जो आपके घर में गाया जाता है वही गाएँ।

Aarti Ka Arth | दुर्गा आरती अर्थ सहित

माँ का स्वरूप (अंतरा 1 से 4)

अर्थ: हे अम्बे, हे गौरी, हे श्यामा, विष्णु, ब्रह्मा और शिव भी दिन-रात तुम्हारा ध्यान करते हैं। तुम्हारी मांग में सिंदूर है, माथे पर कस्तूरी का टीका, उज्ज्वल आँखें और चाँद जैसा सुंदर मुख। सोने जैसा शरीर, लाल वस्त्र और गले में लाल फूलों की माला है। सिंह पर सवार, हाथ में खड्ग और खप्पर लिए माँ देवता, मनुष्य और मुनि सबका दुख हरती हैं। कानों में कुंडल और नाक में मोती है; उनका तेज करोड़ों चंद्रमा और सूर्य के समान है।

असुरों का संहार (अंतरा 5 और 6)

अर्थ: माँ ने शुंभ-निशुंभ को चीर डाला, महिषासुर का वध किया और धूम्रलोचन का नाश किया। चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज को मारा, मधु-कैटभ का अंत किया और देवताओं को निर्भय कर दिया। ये सब कथाएँ दुर्गा सप्तशती में आती हैं।

माँ के अनेक रूप (अंतरा 7 से 9)

अर्थ: तुम ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और लक्ष्मी हो। वेद-शास्त्र तुम्हारा गुणगान करते हैं, तुम शिव की पटरानी हो। चौंसठ योगिनियाँ मंगल गीत गाती हैं, भैरव नाचते हैं और ताल, मृदंग, डमरू बजते हैं। तुम ही जगत की माता हो, पालन करने वाली, भक्तों का दुख हरने वाली और सुख-संपत्ति देने वाली।

आरती का फल (अंतरा 10 से 12)

अर्थ: चार भुजाओं में वरमुद्रा धारण किए माँ की जो भी सेवा करता है, उसे मनचाहा फल मिलता है। सोने की थाली में अगर और कपूर की बाती जल रही है। शिवानंद स्वामी कहते हैं कि जो अम्बे जी की यह आरती गाता है, उसे सुख-संपत्ति मिलती है।

Jai Ambe Gauri Aarti Image | दुर्गा आरती इमेज

Jai Ambe Gauri aarti lyrics की पहली पंक्तियाँ इस इमेज में हैं। आप इसे सेव या डाउनलोड कर सकते हैं।

जय अम्बे गौरी आरती - jai ambe gauri aarti lyrics image
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Aarti Karne Ki Vidhi | आरती उतारने की सही विधि

थाली में क्या रखें

घी का दीपक या कपूर, थोड़े फूल, रोली-अक्षत, एक घंटी और पास में जल का लोटा। प्रसाद के लिए मिश्री, बताशे या फल।

थाली कैसे घुमाएँ

प्रचलित परंपरा है कि आरती पहले माँ के चरणों की ओर चार बार, फिर नाभि की ओर दो बार, मुख की ओर एक बार और फिर पूरे स्वरूप के सामने सात बार घुमाई जाए। थाली को घड़ी की सुई की दिशा में घुमाएँ।

आरती के बाद

थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर छोड़ें। फिर सब लोग दोनों हाथों से ज्योति की गर्माहट लेकर आँखों और सिर पर लगाएँ। उत्तर भारत के कई घरों में इसके बाद “कर्पूरगौरं” श्लोक और “जय माता दी” का जयकारा होता है।

A small tip for families: let the youngest child ring the bell. It keeps them involved, and honestly the aarti sounds a lot more joyful with a slightly off-beat bell.

Durga Aarti Benefits | आरती गाने के फायदे

  • माना जाता है कि आरती से पूजा में हुई छोटी-मोटी कमियाँ पूरी हो जाती हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार घी और कपूर की ज्योति घर के वातावरण को पवित्र करती है।
  • Devotees believe regular aarti on Tuesdays and Fridays brings Maa’s blessings for peace at home.
  • पूरा परिवार साथ गाता है, तो घर में एक साथ बैठने का बहाना बन जाता है।

Kab Gayein | आरती कब गाएँ

अवसर समय
नवरात्रि (शारदीय 2026: 11 से 19 अक्टूबर) सुबह और शाम दोनों
हर मंगलवार और शुक्रवार शाम की पूजा
अष्टमी, कन्या पूजन पूजन के बाद
दुर्गा सप्तशती पाठ पाठ पूरा होने पर

(स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर हो सकता है)

FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Jai Ambe Gauri aarti kisne likhi hai?

आरती के आखिरी अंतरे में “कहत शिवानंद स्वामी” आता है, इसलिए इसे शिवानंद स्वामी की रचना माना जाता है।

दुर्गा आरती में कितने अंतरे हैं?

पहली पंक्ति के बाद बारह अंतरे हैं। कुछ किताबों में शब्दों का थोड़ा फर्क मिलता है।

क्या बच्चे भी यह आरती गा सकते हैं?

बिल्कुल। Jai Ambe Gauri aarti lyrics सरल हिंदी में हैं, इसलिए छोटे बच्चे भी दो-तीन हफ्ते में इसे याद कर लेते हैं।

आरती दिन में कितनी बार करनी चाहिए?

घर में सुबह और शाम दो बार आरती की परंपरा है। समय न हो तो कम से कम शाम को ज़रूर करें।

क्या बिना पूजा के सिर्फ आरती कर सकते हैं?

हाँ। दीपक जलाकर माँ को प्रणाम करें और आरती गाएँ। इससे पहले उस दिन की देवी का मंत्र पढ़ लें, तो और अच्छा।

बोलो अम्बे मात की जय।

Written by

Pavitr Mantra

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