Shiv Panchakshar Stotra is the one that begins with “Nagendra Haraya Trilochanaya”, and if you have ever stood in a Shiv temple on a Monday morning, you have almost certainly heard it. Five short verses, each ending with “Namah Shivaya”, sung in a steady rhythm while milk and water flow over the Shivling.
What makes it special is the design. Each of the five verses starts with one syllable of the Panchakshari mantra: न, म, शि, वा, य. So when you finish the stotra, you have in a way chanted “Om Namah Shivaya” slowly, one letter at a time, with a full verse of praise around each letter. Tradition attributes it to Adi Shankaracharya.
Sawan ho, Mahashivratri ho ya bas ek normal Somvar, this is a stotra you can learn in a week.
विषय सूची | Table of Contents
Shiv Panchakshar Stotra Lyrics | शिव पंचाक्षर स्तोत्र
नीचे हर श्लोक के ठीक बाद उसका सरल हिंदी अर्थ दिया है, ताकि पढ़ते हुए भाव भी साथ चलता रहे।
श्लोक 1: “न” कार
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥१॥
अर्थ: जिनके गले में नागराज का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, जो शरीर पर भस्म लगाते हैं, जो महान ईश्वर हैं, नित्य हैं, शुद्ध हैं और दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं, उन “न” कार स्वरूप शिव को नमस्कार है।
श्लोक 2: “म” कार
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥२॥
अर्थ: जिनकी पूजा गंगाजल और चंदन से होती है, जो नंदीश्वर और प्रमथगणों के स्वामी महेश्वर हैं, जिन्हें मंदार और अनेक प्रकार के फूलों से पूजा जाता है, उन “म” कार स्वरूप शिव को नमस्कार है।
श्लोक 3: “शि” कार
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥३॥
अर्थ: जो कल्याण स्वरूप हैं, जो माँ गौरी के कमल जैसे मुख को खिलाने वाले सूर्य के समान हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का नाश किया, जिनका कंठ नीला है और जिनकी ध्वजा पर वृषभ (नंदी) है, उन “शि” कार स्वरूप शिव को नमस्कार है।
श्लोक 4: “व” कार
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥४॥
अर्थ: वसिष्ठ, अगस्त्य (कुम्भोद्भव) और गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनियों तथा देवताओं ने जिनके मस्तक की पूजा की है, चंद्रमा, सूर्य और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, उन “व” कार स्वरूप शिव को नमस्कार है।
श्लोक 5: “य” कार
यक्षस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥५॥
अर्थ: जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाधारी हैं, जिनके हाथ में पिनाक धनुष है, जो सनातन हैं, दिव्य हैं, देव हैं और दिगम्बर हैं, उन “य” कार स्वरूप शिव को नमस्कार है।
फलश्रुति
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
अर्थ: जो भी भगवान शिव के सान्निध्य में इस पवित्र पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और शिव के साथ आनंद पाता है।
न-म-शि-वा-य: पाँच अक्षर, पाँच श्लोक
| श्लोक | अक्षर | शुरुआती शब्द | मुख्य भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | न | नागेन्द्रहाराय | नागहार, भस्म, दिगम्बर रूप |
| 2 | म | मन्दाकिनी | गंगाजल, चंदन, पुष्प पूजा |
| 3 | शि | शिवाय गौरी | नीलकंठ, दक्ष यज्ञ विनाश |
| 4 | व | वसिष्ठ | ऋषियों द्वारा पूजित, त्रिनेत्र |
| 5 | य | यक्षस्वरूपाय | जटाधारी, पिनाकधारी |
उच्चारण के आसान टिप्स
इस स्तोत्र के लंबे समास वाले शब्द, जैसे “मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय”, पहली बार में अटकते हैं। घबराइए मत, ऐसा सबके साथ होता है।
- लंबे शब्द को छोटे टुकड़ों में तोड़ें: मन्दाकिनी / सलिल / चन्दन / चर्चिताय। पहले धीरे, फिर जोड़कर।
- “त्रिलोचनाय” में “त्रि” साफ़ बोलें, “तिरलोचनाय” नहीं।
- “शिकाराय” और “शिवाय” में “श” का उच्चारण “स” से अलग रखें।
- हर श्लोक की आख़िरी पंक्ति “तस्मै … नमः शिवाय” एक जैसी है, इसे थोड़ा खींचकर गाएँ तो लय अपने आप बन जाती है।
Transliteration (verse 1): Nagendra Haraya Trilochanaya, Bhasmanga Ragaya Maheshvaraya, Nityaya Shuddhaya Digambaraya, Tasmai Na Karaya Namah Shivaya.
Kids especially pick this stotra up fast because of the repeating last line. Once the rhythm settles, it is very easy to remember, even for someone who has never studied Sanskrit.
Shiv Panchakshar Stotra Image | शिव पंचाक्षर स्तोत्र इमेज
पहले श्लोक वाली यह इमेज अपने फ़ोन में save या download कर लें, ताकि मंदिर में पाठ करते समय सामने रहे।

पाठ की विधि
समय
सोमवार की सुबह, प्रदोष काल, सावन का पूरा महीना और महाशिवरात्रि इसके लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। वैसे रोज़ शाम की आरती के बाद भी पढ़ सकते हैं।
कैसे पढ़ें
- स्नान के बाद शिवलिंग या शिव जी की तस्वीर के सामने बैठें।
- जल, कच्चा दूध या बेलपत्र अर्पित करें।
- पहले 11 बार “ॐ नमः शिवाय” बोलें, फिर पूरा स्तोत्र एक, तीन या ग्यारह बार पढ़ें।
- कई मंदिरों में अभिषेक के साथ-साथ इसे गाया जाता है। घर पर भी जल चढ़ाते हुए धीरे-धीरे पाठ कर सकते हैं।
A small tip from experience: learn one verse per day. By Saturday you will know all five, and the next Monday you can chant it without looking at the phone.
Benefits | शिव पंचाक्षर स्तोत्र के फायदे
- फलश्रुति के अनुसार शिव के सान्निध्य में इसका पाठ करने वाला शिवलोक पाता है।
- माना जाता है कि यह पंचाक्षरी मंत्र “नमः शिवाय” के जप जितना ही पुण्यदायी है।
- नियमित पाठ से मन शांत होता है और क्रोध कम होता है, ऐसा भक्तों का अनुभव है।
- संस्कृत के सही उच्चारण के अभ्यास के लिए यह बहुत अच्छा स्तोत्र है।
अगर आप शिव जी का कोई छोटा और शक्तिशाली मंत्र भी साथ जोड़ना चाहें तो महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ भी पढ़ें।
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शिव पंचाक्षर स्तोत्र की रचना किसने की?
परंपरा के अनुसार इसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। यह उनके नाम से जुड़े प्रसिद्ध शिव स्तोत्रों में से एक है।
Shiv panchakshar stotra कितनी बार पढ़ना चाहिए?
रोज़ एक बार पढ़ना काफ़ी है। सोमवार या सावन में 3, 5 या 11 बार पढ़ने की परंपरा है। संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है कि उच्चारण साफ़ हो।
क्या महिलाएँ यह स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
हाँ, बिल्कुल। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ कोई भी श्रद्धालु कर सकता है।
तीसरे श्लोक में कहीं “गौरीवदनारविन्द” लिखा मिलता है, सही कौन-सा है?
कुछ किताबों में यह पाठभेद मिलता है। दोनों का अर्थ एक ही है: गौरी का कमल जैसा मुख। ज़्यादा प्रचलित पाठ “गौरीवदनाब्जवृन्द” है, जो ऊपर दिया गया है।
What is the difference between Panchakshar Stotra and Om Namah Shivaya?
Om Namah Shivaya is the mantra itself. The Panchakshar Stotra is a hymn built around its five syllables, with one verse of praise for each syllable.
ॐ नमः शिवाय।

