Bhojan mantra is the short prayer many of us first learnt in school, standing in a line with our tiffin boxes, when nobody was allowed to take the first bite until the whole class had finished. Some schools taught “Om Saha Navavatu”, some taught “Brahmarpanam”, and a few taught both. Years later, eating in a hurry at an office desk, that small habit is usually the first thing we drop.
In my house, my grandmother never let anyone touch a plate until a little rice was kept aside for the cow and a prayer was said. She never explained much. She would just say, “अन्न देवता है, पहले उसका मान करो।” I understood what she meant much later.
Below you will find the complete bhojan mantra lyrics in Hindi, the meaning of each shloka, where each one comes from, a simple way to recite it at home, and a few tips for teaching it to kids.
विषय सूची | Table of Contents
Bhojan Mantra Lyrics | भोजन मंत्र
सबसे प्रचलित भोजन मंत्र श्रीमद्भगवद्गीता के चौथे अध्याय का 24वां श्लोक है। ज़्यादातर घरों, आश्रमों और विद्यालयों में खाना शुरू करने से पहले यही बोला जाता है। शुरुआत में ॐ लगाना परंपरा है।
ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥
Brahmarpanam Meaning | अर्थ सहित
अर्थ: अर्पण करने का साधन ब्रह्म है, अर्पित की जाने वाली वस्तु (हवि) ब्रह्म है, जिस अग्नि में आहुति दी जा रही है वह ब्रह्म है और आहुति देने वाला भी ब्रह्म ही है। जो मनुष्य हर कर्म में इस तरह ब्रह्म को ही देखता है, वह ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
खाने के समय इसका भाव बहुत सीधा है। थाली का अन्न, खाने वाला और पेट की जठराग्नि, तीनों उसी परमात्मा के रूप हैं। यानी भोजन करना भी एक छोटा-सा यज्ञ है।
Transliteration: Om Brahmarpanam Brahma Havir Brahmagnau Brahmana Hutam, Brahmaiva Tena Gantavyam Brahma Karma Samadhina.
अहं वैश्वानरो भूत्वा (गीता 15.14)
कई परिवार और गुरुकुल ब्रह्मार्पणं के ठीक बाद यह दूसरा श्लोक भी जोड़ते हैं। यह भी गीता से ही है, पंद्रहवें अध्याय का 14वां श्लोक।
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः।
प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्॥
अर्थ: भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं ही वैश्वानर अग्नि बनकर सभी प्राणियों के शरीर में रहता हूँ और प्राण तथा अपान वायु के साथ मिलकर चार प्रकार के अन्न को पचाता हूँ। चार प्रकार के अन्न हैं: भक्ष्य (चबाकर खाया जाने वाला), भोज्य (निगला जाने वाला), लेह्य (चाटा जाने वाला) और चोष्य (चूसा जाने वाला)।
ॐ सह नाववतु (School Prayer)
यह असल में कृष्ण यजुर्वेद की उपनिषदों, जैसे कठ और तैत्तिरीय उपनिषद, का शांति पाठ है, जो गुरु और शिष्य साथ मिलकर बोलते थे। इसमें “भुनक्तु” (पालन करें, भोग कराएँ) शब्द और साथ बैठने का भाव है, इसलिए स्कूलों में इसे भोजन से पहले बोलने की परंपरा बन गई।
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
अर्थ: परमात्मा हम दोनों की साथ-साथ रक्षा करें, हम दोनों का साथ-साथ पालन करें, हम मिलकर शक्ति प्राप्त करें, हमारा पढ़ा हुआ तेजस्वी हो और हम कभी एक-दूसरे से द्वेष न करें। तीनों प्रकार के तापों की शांति हो।
अन्नपूर्णा मंत्र
यह श्लोक आदि शंकराचार्य के नाम से प्रसिद्ध अन्नपूर्णा स्तोत्र का है। घर की रसोई में माँ अन्नपूर्णा को याद करने के लिए कई गृहिणियाँ इसे रोज़ बोलती हैं।
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥
अर्थ: हे सदा अन्न से परिपूर्ण रहने वाली माँ अन्नपूर्णा, भगवान शंकर की प्राणप्रिया पार्वती, ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए मुझे भिक्षा प्रदान करें।
Bhojan Mantra Image | भोजन मंत्र इमेज
बच्चों के कमरे या डाइनिंग टेबल के पास लगाने के लिए नीचे दी गई bhojan mantra image को आप save या download कर सकते हैं।

भोजन मंत्र बोलने की विधि
शुरू करने से पहले
हाथ-पैर धोकर, शांत मन से थाली के सामने बैठें। अगर ज़मीन पर आसन बिछाकर बैठ सकें तो सबसे अच्छा, वरना कुर्सी पर भी कोई दोष नहीं। टीवी और फ़ोन कुछ पल के लिए दूर रख दें।
मंत्र कैसे बोलें
- दोनों हाथ जोड़ें और आँखें बंद करके एक बार ब्रह्मार्पणं श्लोक बोलें।
- चाहें तो साथ में अहं वैश्वानरो और अन्नपूर्णा श्लोक भी जोड़ लें।
- कई घरों में थाली के चारों ओर थोड़ा जल घुमाकर और पहला ग्रास गाय के लिए अलग निकालकर ही खाना शुरू होता है।
- मंत्र के बाद मन में एक बार उन सबको धन्यवाद दें जिन्होंने यह अन्न उगाया और पकाया।
Office या hostel में
Honestly, at a work cafeteria you may not want to fold hands and close eyes in front of everyone, and that is fine. Just pause for five seconds and say the shloka silently in your mind. भाव ही असली चीज़ है।
बच्चों को कैसे सिखाएँ
छोटे बच्चों के साथ पहले सिर्फ़ पहली पंक्ति रोज़ बोलें। एक हफ़्ते बाद दूसरी पंक्ति जोड़ें। खाने से पहले पूरा परिवार साथ बोले तो बच्चे बिना कहे सीख जाते हैं। सुबह के लिए कराग्रे वसते लक्ष्मी मंत्र भी इसी तरह सिखाया जा सकता है।
Benefits | भोजन मंत्र के फायदे
- मान्यता है कि भगवान को अर्पित भाव से खाया गया अन्न प्रसाद बन जाता है।
- खाने से पहले कुछ पल रुकने से हम धीरे और ध्यान से खाते हैं।
- अन्न के प्रति कृतज्ञता आती है और जूठन छोड़ने की आदत कम होती है।
- परिवार के साथ बोलने पर घर में एक अपनापन और अनुशासन बनता है।
- शास्त्रों के अनुसार शुद्ध भाव से ग्रहण किया भोजन मन को भी सात्त्विक रखता है।
कौन-सा मंत्र कब बोलें
| मंत्र | स्रोत | कब बोलें |
|---|---|---|
| ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः | भगवद्गीता 4.24 | हर भोजन से पहले |
| अहं वैश्वानरो भूत्वा | भगवद्गीता 15.14 | ब्रह्मार्पणं के बाद |
| ॐ सह नाववतु | उपनिषद शांति पाठ | स्कूल, समूह भोजन |
| अन्नपूर्णे सदापूर्णे | अन्नपूर्णा स्तोत्र | रसोई में, खाना बनाते या परोसते समय |
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सबसे सही bhojan mantra कौन-सा है?
कोई एक ही सही नहीं है। सबसे ज़्यादा बोला जाने वाला गीता का ब्रह्मार्पणं श्लोक है। स्कूलों में ॐ सह नाववतु भी उतना ही प्रचलित है। जो आपके घर की परंपरा हो, वही बोलें।
क्या भोजन मंत्र खाने के बाद भी बोला जाता है?
मुख्य रूप से यह खाने से पहले बोला जाता है। खाने के बाद कई लोग बस हाथ जोड़कर भगवान और अन्नदाता को धन्यवाद देते हैं।
क्या मांसाहारी भोजन से पहले भोजन मंत्र बोल सकते हैं?
परंपरागत रूप से यह मंत्र सात्त्विक भोजन और भगवान को अर्पित अन्न के लिए बोला जाता है। बाकी आपकी पारिवारिक मान्यता पर निर्भर करता है।
क्या बच्चे बिना अर्थ जाने भोजन मंत्र बोल सकते हैं?
हाँ, शुरुआत में आदत बनना ज़्यादा ज़रूरी है। थोड़े बड़े होने पर उन्हें अर्थ सरल शब्दों में समझा दें, तब वे इसे मन से बोलने लगते हैं।
Is this food prayer only for Hindus?
The words come from the Gita and Upanishads, but the idea of thanking the source of food is universal. Many schools across India recite it as a simple prayer of gratitude.
अगली बार थाली सामने आए तो बस पाँच सेकंड रुकिए और मन से एक बार बोल दीजिए। यही छोटी-सी आदत आगे चलकर बहुत कुछ सिखा देती है।

