Govardhan Puja mantra is recited on the day after the main Diwali festivities, when families shape a small Govardhan parvat out of cow dung or clay in the courtyard and worship it along with Shri Krishna and the cows. In Braj, Mathura and across UP, Rajasthan, Haryana and Gujarat this day is also called Annakut, because a mountain of food is offered to the Lord.
The story behind it is one every child in Braj knows. Indra sent days of heavy rain to punish Gokul, and little Krishna lifted Govardhan hill on one finger so the villagers and their cattle could take shelter under it. The festival is a thank-you to the hill, to the cows and to Krishna.
In 2026, Govardhan Puja falls on 10 November. (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर हो सकता है)
विषय सूची | Table of Contents
Govardhan Puja Mantra | गोवर्धन पूजा का मुख्य मंत्र
गोवर्धन की परिक्रमा और पूजा करते समय यह श्लोक सबसे अधिक बोला जाता है। इसमें गोवर्धन पर्वत को सीधे संबोधित किया गया है।
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥
अर्थ: हे पृथ्वी को धारण करने वाले गोवर्धन, हे गोकुल की रक्षा करने वाले, जिन्हें भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) ने अपनी भुजा से ऊँचा उठाया था, आप हमें करोड़ों गायें यानी भरपूर समृद्धि देने वाले हों।
Transliteration: Govardhana dharaadhaara gokula traanakaaraka, Vishnu-baahu kritochchhraaya gavaam koti-prado bhava.
पुराने समय में गाय ही सबसे बड़ा धन मानी जाती थी, इसलिए “गवां कोटिप्रदो भव” को आज के संदर्भ में घर की सुख-समृद्धि की प्रार्थना समझा जाता है।
गौ पूजा मंत्र | Gau Puja Mantra
गोवर्धन पूजा के दिन गायों और बछड़ों को नहलाकर, तिलक लगाकर और गुड़-रोटी खिलाकर पूजा की जाती है। गाय को प्रणाम करते हुए यह श्लोक बोला जाता है:
लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु॥
अर्थ: जो लक्ष्मी लोकपालों की धेनु (गाय) के रूप में स्थित हैं और यज्ञ के लिए घी प्रदान करती हैं, वे मेरे पापों को दूर करें।
श्रीकृष्ण प्रार्थना
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
अर्थ: वसुदेव के पुत्र, हरि, परमात्मा श्रीकृष्ण को प्रणाम। शरणागत के क्लेश नष्ट करने वाले गोविन्द को बार-बार नमस्कार।
Govardhan Puja Mantra Image | गोवर्धन मंत्र इमेज
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गोवर्धन पूजा सामग्री
| सामग्री | किस काम आती है |
|---|---|
| गाय का गोबर या साफ मिट्टी | गोवर्धन पर्वत और ग्वाल-बाल की आकृति बनाने के लिए |
| रोली, चावल, हल्दी | तिलक और अक्षत |
| फूल, खील-बताशे | पर्वत पर चढ़ाने के लिए |
| दूध, दही, शहद, गंगाजल | नाभि स्थान पर अर्पण |
| दीपक, धूप | आरती के लिए |
| अन्नकूट का भोग | कढ़ी-चावल, बाजरा, मिक्स सब्ज़ी, पूरी, मिठाई |
गोवर्धन पूजा विधि | Step by Step
हर इलाके की अपनी रीत है। नीचे वह तरीका है जो उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में अपनाया जाता है।
1. गोवर्धन बनाना
सुबह स्नान के बाद आँगन या घर के बाहर साफ जगह पर गोबर से लेटे हुए पुरुष के आकार में गोवर्धन जी बनाए जाते हैं। बीच में नाभि की जगह एक छोटा गड्ढा रखें। आसपास गाय, बछड़े और ग्वालों की छोटी आकृतियाँ भी बनाई जाती हैं। शहर के फ्लैट में रहते हैं तो एक थाली में थोड़ी मिट्टी या आटे से छोटा पर्वत बना लीजिए, भाव वही रहेगा।
2. पूजन
गोवर्धन जी पर रोली, चावल, फूल और खील-बताशे चढ़ाएं। नाभि वाले स्थान पर दूध, दही, शहद और गंगाजल डालें। दीपक जलाकर ऊपर दिया गया गोवर्धन मंत्र बोलें।
3. परिक्रमा
परिवार के सभी सदस्य हाथ में जल का लोटा लेकर, जल की धार गिराते हुए और जौ बोते हुए सात परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा के दौरान “गोवर्धन धराधार” या “गोविन्द” नाम का जाप चलता रहता है।
4. अन्नकूट भोग
इसके बाद श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगता है। मेरी नानी के घर में उस दिन कढ़ी, बाजरे की खिचड़ी और मौसम की सारी सब्ज़ियाँ मिलाकर एक सब्ज़ी ज़रूर बनती थी। मंदिरों में तो छप्पन भोग सजते हैं। घर में जितना सहज हो, उतना ही बनाइए।
5. गौ पूजा और आरती
गाय उपलब्ध हो तो उसे तिलक लगाकर गुड़ और रोटी खिलाएं और गौ मंत्र बोलें। अंत में श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें।
Govardhan Puja ke Fayde | गोवर्धन पूजा के लाभ
शास्त्रों और ब्रज की परंपरा के अनुसार इस पूजा से जुड़ी मान्यताएं:
- घर में अन्न और धन की कमी न रहने का आशीर्वाद मिलता है, ऐसा माना जाता है।
- पशुधन और खेती-बाड़ी की रक्षा की कामना पूरी होती है।
- श्रीकृष्ण की कृपा से कठिन समय में सहारा मिलने का विश्वास है, जैसे गोकुल को मिला था।
- प्रकृति, पर्वत और गाय के प्रति कृतज्ञता का भाव मन में बढ़ता है।
- अन्नकूट के बहाने परिवार और पड़ोसी एक साथ प्रसाद पाते हैं।
सावधानियां
- गोवर्धन पर्वत पर पैर न पड़े, बच्चों को पहले ही समझा दें।
- भोग में प्याज़-लहसुन का प्रयोग न करें।
- पूजा के बाद गोबर के गोवर्धन को इधर-उधर न फेंकें। कई परिवार उसे खेत या गमलों में डाल देते हैं।
Govardhan Puja is the fourth day of the Diwali festival week. The next day is Bhai Dooj, and you can read the tilak vidhi in our post on Bhai Dooj Tilak Mantra.
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Govardhan Puja 2026 kab hai?
2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को है। अपने शहर के पंचांग से एक बार तिथि ज़रूर मिला लें।
Govardhan Puja mantra kaun sa bolna chahiye?
मुख्य मंत्र “गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक। विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥” है। साथ में गौ पूजा के लिए “लक्ष्मीर्या लोकपालानां” श्लोक बोला जाता है।
गोबर न हो तो गोवर्धन कैसे बनाएं?
शहरों में गोबर मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में साफ मिट्टी, आटे या अन्नकूट के भोग को ही पर्वत के आकार में सजाकर पूजा की जा सकती है। कई मंदिर भी यही करते हैं।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा एक ही हैं?
हाँ, दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं। गोवर्धन पर्वत की पूजा और भगवान को अन्न के पहाड़ जैसा भोग, दोनों इसी पर्व के हिस्से हैं।
क्या परिक्रमा सात ही होनी चाहिए?
अधिकतर घरों में सात परिक्रमा की जाती है। समय या स्वास्थ्य की दिक्कत हो तो एक परिक्रमा भी श्रद्धा से की जा सकती है।


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