The story behind the Kanakdhara Stotram lyrics is one I first heard from my Mama, sitting on the steps of a temple in Kerala. A young boy named Shankara, still a brahmachari, went from house to house asking for bhiksha. At one poor home near Kalady, the lady of the house had nothing to give. After searching every corner, she found a single dry amla and placed it in his bowl with trembling hands.
Moved by her selflessness, the boy prayed to Maa Lakshmi on her behalf. Tradition says that as he finished, golden amla fruits rained down on the house. Kanaka means gold and dhara means a stream. That boy grew up to be Adi Shankaracharya, and the hymn he sang that day is the Kanakdhara Stotram.
What stays with me is that the prayer was not for himself. It was for someone else’s poverty.
विषय सूची | Table of Contents
Kanakdhara Stotram Lyrics | कनकधारा स्तोत्र
पूरे स्तोत्र में संस्करण के अनुसार लगभग 18 से 21 श्लोक मिलते हैं, और कुछ पुस्तकों में श्लोकों की गिनती भी थोड़ी अलग होती है। यहाँ इसके सबसे अधिक पढ़े जाने वाले मुख्य श्लोक अर्थ सहित दिए गए हैं। नियमित पाठ के लिए पूरा स्तोत्र किसी प्रामाणिक पुस्तक से पढ़ें।
ध्यान दें कि लगभग हर श्लोक में लक्ष्मी जी की “दृष्टि” या “कटाक्ष” की बात है। शंकराचार्य धन सीधे नहीं माँगते, बस इतना माँगते हैं कि माँ की एक नज़र उस घर पर पड़ जाए। बाकी सब उसी कृपा-दृष्टि से अपने आप हो जाता है।
पहला श्लोक | अङ्गं हरेः
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
अर्थ: जैसे भ्रमरी कलियों से सजे तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, वैसे ही जो दृष्टि रोमांच से सुशोभित श्रीहरि के अंगों पर टिकी रहती है और जिसमें समस्त ऐश्वर्य समाया है, मंगल की देवी लक्ष्मी की वह कटाक्ष-लीला मेरे लिए मंगलकारी हो।
दूसरा श्लोक | मुग्धा मुहुः
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः॥
अर्थ: जैसे भौंरी किसी बड़े नीलकमल पर बार-बार मंडराती है, वैसे ही जो दृष्टि प्रेम और लज्जा से भरकर मुरारी के मुख की ओर बार-बार जाती और लौट आती है, सागर से प्रकट हुई लक्ष्मी की वह दृष्टिमाला मुझे श्री प्रदान करे।
तीसरा श्लोक | विश्वामरेन्द्र
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षम्
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्धम्
इन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः॥
अर्थ: जो दृष्टि इंद्र का पद और वैभव तक देने में समर्थ है, जो मुर के शत्रु विष्णु को भी अत्यधिक आनंद देती है, नीलकमल के भीतरी भाग जैसी सुंदर इंदिरा की वह आधी खुली दृष्टि क्षण भर के लिए मुझ पर भी ठहर जाए।
कथा वाला श्लोक | दद्याद् दयानुपवनो
यह वह श्लोक है जिसे परंपरा में उस निर्धन स्त्री की कथा से सबसे अधिक जोड़ा जाता है:
दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधाराम्
अस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः॥
अर्थ: दया रूपी पवन से प्रेरित नारायण-प्रिया लक्ष्मी के नेत्र रूपी बादल, मेरे बुरे कर्मों रूपी धूप को बहुत दूर हटाकर, इस दुःखी और निर्धन पक्षी-शिशु जैसे मुझ पर धन की जलधारा बरसाएँ।
फलश्रुति | स्तुवन्ति ये
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥
अर्थ: जो लोग प्रतिदिन इन स्तुतियों से वेदमयी, तीनों लोकों की माता रमा की स्तुति करते हैं, वे इस पृथ्वी पर गुणवान, बड़े भाग्यशाली और विद्वानों द्वारा सम्मानित होते हैं।
Angam Hareh Pulaka-bhushanam-ashrayanti, Bhringanganeva Mukulabharanam Tamalam…
Kanakdhara Stotram Lyrics Image | कनकधारा स्तोत्र इमेज
कनकधारा स्तोत्र के पहले श्लोक की यह इमेज आप सेव या डाउनलोड करके रोज़ के पाठ के लिए रख सकते हैं।

कनकधारा स्तोत्र पाठ विधि | Path Vidhi
कब पढ़ें
शुक्रवार, पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, धनतेरस और दिवाली पर इसका पाठ विशेष माना जाता है। रोज़ पढ़ना चाहें तो सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक जलाकर पढ़ें।
कैसे बैठें
पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। सामने लक्ष्मी जी का चित्र या श्रीयंत्र रखें, घी का दीपक और कमल या लाल फूल अर्पित करें। एक छोटी कटोरी में सूखे आँवले या कोई भी फल रख सकते हैं, कथा की याद में।
उच्चारण
संस्कृत के लंबे समास पहली बार में कठिन लगते हैं। Don’t worry about speed. Read one verse slowly, break the compound words where the line naturally pauses, and listen to a trusted recording once or twice. Within a week or two it becomes much easier.
कितनी बार
रोज़ एक बार पूरा पाठ पर्याप्त है। कई भक्त 21 या 40 दिनों तक बिना नागा पाठ का संकल्प लेते हैं।
If you are short on time on a weekday, read at least the first verse and the दद्याद् दयानुपवनो verse given above, and keep the full path for Friday. Something small done every day is better than a big path done once a month.
Kanakdhara Stotram Ke Fayde | कनकधारा स्तोत्र के लाभ
- भक्तों का विश्वास है कि इस स्तोत्र के पाठ से आर्थिक तंगी और कर्ज़ की परेशानी में राहत मिलती है।
- फलश्रुति के अनुसार नियमित पाठ करने वाला गुणवान और भाग्यशाली होता है।
- माना जाता है कि घर में सुख, शांति और लक्ष्मी की स्थिर कृपा बनी रहती है।
- दूसरों के लिए प्रार्थना करने की भावना इस स्तोत्र का मूल है, जिससे मन में करुणा बढ़ती है।
लक्ष्मी जी के छोटे मंत्र रोज़ जपने के लिए हमारी Lakshmi Mantra for Money पोस्ट देखें, और पाठ के बाद लक्ष्मी जी की आरती गा सकते हैं।
एक नज़र में | Quick Facts
| बात | विवरण |
|---|---|
| रचयिता | आदि शंकराचार्य (परंपरा के अनुसार) |
| देवता | माँ लक्ष्मी |
| भाषा | संस्कृत |
| पूरा पाठ | लगभग 10 से 12 मिनट |
| श्रेष्ठ दिन | शुक्रवार, दिवाली, अक्षय तृतीया |
FAQs | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कनकधारा स्तोत्र किसने लिखा है?
परंपरा के अनुसार इसकी रचना आदि शंकराचार्य ने बाल्यावस्था में केरल के कालडी के पास एक निर्धन ब्राह्मण परिवार के लिए की थी।
क्या कनकधारा स्तोत्र हिंदी में पढ़ सकते हैं?
मूल पाठ संस्कृत में ही पढ़ना उत्तम माना जाता है। अगर उच्चारण कठिन लगे तो साथ में हिंदी अर्थ पढ़ें ताकि भाव समझ आए। भाव के साथ किया गया पाठ ही असली पाठ है।
Kanakdhara Stotram kitne din padhna chahiye?
इसकी कोई बाध्यता नहीं है। रोज़ एक बार पढ़ सकते हैं, या किसी शुक्रवार से 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर पाठ कर सकते हैं।
क्या महिलाएँ कनकधारा स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
हाँ, यह स्तोत्र कोई भी श्रद्धालु पढ़ सकता है। बहुत से घरों में यह पाठ घर की महिलाएँ ही शुक्रवार को करती हैं।
Kanakdhara Stotram lyrics का पूरा पाठ कहाँ से लें?
गीता प्रेस जैसी प्रकाशन संस्थाओं की स्तोत्र संग्रह पुस्तकें या किसी मंदिर से मिली प्रामाणिक पुस्तिका सबसे भरोसेमंद है। ऊपर दिए मुख्य श्लोक उसी परंपरागत पाठ के अनुसार हैं।
माँ लक्ष्मी की कृपा आप पर और आपके अपनों पर बनी रहे।


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