Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra in Hindi (या देवी सर्वभूतेषु मंत्र)

“Ya Devi Sarva Bhuteshu” is a popular mantra in Hinduism dedicated to the goddess Durga. If you looking to Chant Ya Devi Sarva Bhuteshu mantra in Hindi and wants to know its meaning then you are at right place. This powerful mantra holds significant importance and is chanted by devotees to invoke the blessings and protection of the goddess Durga. 

जो भी भक्त या देवी सर्वभूतेषु मंत्र द्वारा देवी की आराधना करते हैं, भक्ति प्रकट करते हैं उनको माता का विशेष आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती हैं। इस मंत्र के जाप से भक्त को शांति, सुख, समृद्धि और सुरक्षा की प्राप्ति होती है। माँ देवी की कृपा से भक्त के सभी भय, कष्टों और दुखो का निवारण होता है। 

यह मंत्र अनुशासन, धैर्य, निर्णय, उत्साह, साहस और शक्ति का प्रतीक है। यह माँ देवी के प्रति श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करता है और उनकी अनंत कृपा को आमंत्रित करता है।

Here is a detailed explanation of the mantra “Ya Devi Sarva Bhuteshu” in Hindi:

Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra in Hindi ( या देवी सर्वभूतेषु मंत्र हिंदी )

या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति-रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या (Ya): यहां “या” देवी का प्रतिष्ठित नाम है, जो देवी की पहचान है।

देवी (Devi): देवी शब्द का अर्थ है माँ दुर्गा, जो भगवान शिव और पार्वती की संयोजना हैं। यह शब्द माँ की पूजा के लिए उपयोग होता है।

सर्वभूतेषु (Sarva Bhuteshu): इसका अर्थ है “सभी प्राणियों में”। यह बताता है कि माँ देवी सभी प्राणियों में स्थित हैं और सभीका पालन-पोषण करती हैं।

शक्ति-रूपेण (Shakti-Rupena): इस भाग में बताया गया है कि माँ देवी का स्वरूप शक्ति है। वह समस्त शक्तियों का संचालन करती हैं और सृष्टि की रक्षा करती हैं।

संस्थिता (Sthita): इस शब्द का अर्थ होता है “स्थिर होना” या “निवास करना”। यह शब्द बताता है कि माँ देवी सभी प्राणियों में स्थित रहती हैं और उनकी रक्षा करती हैं।

नमस्तस्यै (Namastasyai): “नमस्तस्यै” शब्द माँ देवी को समर्पित करता है, जिसका अर्थ है “नमन करता हूँ”। यह प्रकट करता है कि भक्त माँ देवी की आराधना करते हैं और उनकी कृपा के लिए नमस्कार करते हैं।

नमस्तस्यै (Namastasyai): “नमस्तस्यै” शब्द को दोहराया जाता है, इससे भक्त की आदर और आभार प्रकट होता है।

नमस्तस्यै (Namastasyai): “नमस्तस्यै” शब्द को फिर से दोहराया जाता है। इससे भक्त का गहन आदर प्रकट होता है।

नमो नमः (Namo Namah): यह शब्द दोहराया जाता है, जिससे भक्त अपनी पूरी समर्पणता और भक्ति प्रकट करता है। इससे भक्त माँ देवी को आदर्श बताता है और उनकी कृपा की प्रार्थना करता है।

Ya Devi Sarvabhuteshu – Durga Devi Full Mantra (Hindi Meaning)

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥

हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो।
कल्याण दायिनी शिवा हो।
सब पुरुषार्थो को (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को) सिद्ध करने वाली हो।
शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो।
हे नारायणी, तुम्हें नमस्कार है।


शक्ति

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


चेतना

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभि -धीयते।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में चेतना कहलाती हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।
(चेतना : sense, consciousness – स्वयं के और अपने आसपास के वातावरण के तत्वों का बोध होने, उन्हें समझने तथा उनकी बातों का मूल्यांकन करने की शक्ति)


मातृ (माता)

या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


दया

या देवी सर्वभूतेषु दया-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में दया के रूप में विद्यमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


क्षान्ति (क्षमा)

या देवी सर्वभूतेषू क्षान्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में सहनशीलता, क्षमा के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


बुद्धि

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धि-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सभी प्राणियों में बुद्धि के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है। आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।


विद्या

या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में विद्या के रूप में विराजमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।


स्मृति

या देवी सर्वभूतेषु स्मृति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

स्मृति : memory : याद, स्मरणशक्ति, याददाश्त, यादगार
जो देवी सभी प्राणियों में स्मृति (स्मरणशक्ति) रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


श्रद्धा

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी समस्त प्राणियों में श्रद्धा, आदर, सम्मान के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।


भक्ति

या देवी सर्वभूतेषु भक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में भक्ति, निष्ठा, अनुराग के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है। आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।


शांति

या देवी सर्वभूतेषु शांति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी समस्त प्राणियों में शान्ति के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


लक्ष्मी

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी, वैभव के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


जाति

या देवी सर्वभूतेषू जाति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जाति : जन्म , सभी वस्तुओ का मूल कारण
जो देवी सभी प्राणियों का मूल कारण है, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


कान्ति (तेज, ऊर्जा)

या देवी सर्वभूतेषू कान्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सभी प्राणियों में तेज, दिव्यज्योति, उर्जा रूप में विद्यमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


तृष्णा

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सभी प्राणियों में चाहत के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


क्षुधा

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी समस्त प्राणियों में भूख के रूप में विराजमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


भ्रान्ति

या देवी सर्वभूतेषू भ्रान्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

भ्रान्ति : illusion, delusion : माया, मोह, प्रपंच
जो देवी सब प्राणियों में भ्रान्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


वृत्ति

या देवी सर्वभूतेषु वृत्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

वृत्ति : instinct : सहज प्रवृत्ति, मूल प्रवृत्ति, अन्तःप्रेरणा, सहजवृत्ति, स्वाभाविक बुद्धि
जो देवी सब प्राणियों में वृत्ति, सहज प्रवृत्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


तुष्टि

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सब प्राणियों में सन्तुष्टि के रूप में विराजमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।


निद्रा

या देवी सर्वभूतेषु निद्रा-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

जो देवी सभी प्राणियों में आराम, नींद के रूप में विराजमान हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।

Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra Image

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Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra Pdf (या देवी सर्वभूतेषु मंत्र Pdf)

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Ya Devi Sarva Bhuteshu Mantra pdf

या देवी सर्वभूतेषु मंत्र जपने से भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, उन्हें शांति, सुख और आनंद की प्राप्ति होती है। यह मंत्र भक्त को सार्वभौमिक एवं आध्यात्मिक संवृद्धि प्रदान करता है और उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन में सहायता करता है।

सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति में या देवी सर्वभूतेषु मंत्र को माँ दुर्गा और उनकी विभिन्न स्वरूपों की पूजा में प्रयोग किया जाता है। इस मंत्र को नियमित रूप से जपने से भक्त को आध्यात्मिक एवं मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है और उन्हें माँ देवी की कृपा प्राप्त होती है।